Wednesday, October 27, 2010

हकलाने के रोग के खिलाफ क्लीनिकल कोशिश वाला विशेषज्ञ

हकलाने के रोग के खिलाफ क्लीनिकल कोशिश वाला विशेषज्ञ

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हकलाने वाले हमारे जीवन में अक्सर दिखाई पड़ते हैं । ये लोग किसी कारण से सामान्य तौर पर नहीं बोल सकते हैं । हकलाना आम तौर पर बचपन से ही शुरू होता है । यह रोग होने का कारण अभी तक साफ नहीं है , पर इस रोग से ग्रस्त लोगों को हमेशा के लिए जिंदगी भर दुख उठाना पड़ता है । इसलिए बहुत से चिकित्सक जी-जान से हकलाने का इलाज करने की कोशिश कर रहे हैं ।
उत्तरी चीन के शिआन शहर में हकलाने के रोग के लिए विशेषज्ञ प्रोफेसर चेन च्या रूं अनेक वर्षों से हकलाने के रोग को दूर करने के उपायों का अनुसंधान कर रहे हैं और इस क्षेत्र में उन्होंने बड़ी प्रगति भी हासिल की है । इधर के वर्षों में उन्हों ने अपने तरीके से कोई बीस हजार रोगों को हकलाने के रोग और दुख से मुक्त किया है ।
श्री चेन ने शिआन शहर में स्थापित अपने 'बोलियों का आदान-प्रदान विशेष स्कूल 'में संवाददाताओं को बताया कि हकलाने वालों का सब से बड़ा दुख यही है कि वे अपने दिल की बातें दूसरों को आसानी से नहीं बता पाते । मिसाल के तौर पर शू नामक एक व्यक्ति हकलाने के कारण चालीस वर्षों से साफ-साफ नहीं बोल सका । प्रोफेसर चेन के स्कूल में कुछ समय तक अभ्यास करने के बाद उन्हें बोलने में भाषा के प्रयोग की क्षमता हासिल हुई । पर खेद की बात है कि उस की पिता जी उसे बोलता देखने से पहले ही चले गये ।
स्कूल में देश के कोने-कोने से आये हुए छात्र हैं । सिंच्यांग स्वायत्त प्रदेश से आए लड़के वांग ह्वा ने कहा कि कल की क्लास में अध्यापक ने उसे मानसिक शिक्षा दी और उस के दिल में सक्रिय भावना पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया। लड़का वांग ह्वा पहले उदासी में फंसा हुआ था , स्कूल में शिक्षा लेने के बाद अब वह एक खुला और प्रसन्नचित्त लड़का बन गया है ।
उस ने संवाददाता को बताया , अब मैं एक तेल मजदूर हूं , बाद में मैं भी कारोबारों में निर्देशक जैसा लीडर बनना चाहूंगा । और यहां के अभ्यास से मेरे भविष्य की लिए नींव तैयार हो रही है।
शिआन शहर के'बोलियों का आदान-प्रदान विशेष स्कूल 'में पढ़ने वाले छात्रों के साथ बातचीत करते समय कोई मौखिक बाधा नहीं महसूस होती है । लेकिन इने-गिने दिनों से पहले उन की हालत गंभीर ही थी ।
श्री चेन के इलाज करने के तरीके की ऐसी विशेषता है कि छात्र बहुत जल्द समय के भीतर ही स्पष्ट प्रगति हासिल कर सकते हैं । क्योंकि श्री चेन के उपाय के मुताबिक हकलों को साहस के साथ अपना मुंह खोलना ही पड़ता है । इसलिए चेन ने अपने छात्रों से यह मांग की है कि जो देखना है , उसे अपने मुंह से बोलना है और जो विचार में आता है , उसे मुंह में से निकालना है । हकलाने वाले शुरू में मुंह खोलने में हिचकिचाते हैं , पर ऐसा अभ्यास करने के जरिये उन की बातें सुव्यवहारिक बनने लगती हैं । इसमें मानसिक बंधन को हटाना बहुत महत्वपूर्ण है । इसलिए श्री चेन के स्कूल में हकलाहट से ग्रस्त रोगियों के लिए कुल 27 दिनों का कोर्स है , जिस के जरिये रोगी आम तौर पर सामान्य बन सकते हैं ।
श्री चेन ने कहा कि उन के स्कूल में सब से पहले छात्रों को धीरे-धीरे बातचीत करना सिखाया जाता है । यानी नम्रता से बातचीत करनी चाहिये । इस के बाद छात्रों को मानसिक तौर पर तैयार किया जाता है । क्योंकि हकलाने वालों में आम तौर पर आत्मविश्वास की कमी रहती है । इसलिए हकलाहट को दूर करने के लिए सर्वप्रथम उन में आत्मविश्वास की कमी को दूर करना जरुरी है ,और चेन के स्कूल में छात्रों को मानसिक विश्लेषण, याद करने तथा मानसिक दबाव से मुक्त करने आदि के उपाय अपनाए जाते हैं । अवचेतन को बदलाने के जरिये हकलाने वालों के विचारों में परिवर्तन किया जा सकता है ।
श्री चेन ने कहा कि हकलाहट से ग्रस्त छात्र आम तौर पर तनावग्रस्त होने की स्थिति में, आसपास बहुत भीड़ होने पर, या विपरित लिंग के सामने हकलाने लगते हैं । इसलिए ऐसे छात्रों की मदद के लिए उन की ऐसी भावना को सर्वप्रथम तौर पर दूर किया जाना चाहिये । इस के बाद छात्रों को अधिकाधिक लोगों के सामने भाषण देने के लिए और दूसरों के साथ संपर्क रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। 
श्री चेन अक्सर अपने हकलाने वाले छात्रों को सड़क, बसों जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों में भाषण देने का अभ्यास करवाते हैं , ताकि उन के मानसिक धैर्य को उन्नत किया जा सके । इस उपाय से छात्रों को बड़ा लाभ मिलता है । छात्रों में से एक , मिस वांग यू ली ने कहा , मैं पहले हकलाने के कारण बहुत कम बातचीत कर पाती थी । क्योंकि मैं दूसरों के सामने आसानी से नहीं बोल सकती थी । अगर दूसरों ने मेरी हकलाहट की चर्चा की या मेरे सामने इस बात को उठाया , तो मुझे बहुत दुख होता था। यहां अभ्यास करके मैं बेरोकटोक बातचीत कर सकती हूं , यह मेरी जिंदगी भर की अभिलाषा है ।
लेकिन लोग यह नहीं जानते हैं कि'बोलियों का आदान-प्रदान विशेष स्कूल 'के संस्थापक श्री चेन च्या रूं खुद भी एक हकलाने वाले व्यक्ति थे । अपने बचपन से ही श्री चेन हकलाहट से ग्रस्त रहे थे । उन्हों ने कहा, दूसरे लोगों के सामने जब भी मैं मुंह खोलता , मेरा दिल धक-धक दौड़ने लगता ,मेरी सांस फूल जाती और शरीर पसीने से लथपथ हो जाता। मीडिल स्कूल में अपना कोर्स समाप्त करने के बाद श्री चेन च्या रूं ने अपने रोग का खुद इलाज करना शुरू किया और इस में अनेक उपायों की खोज की ।
उन्हों ने कहा कि हकलाहट का खात्मा करने के लिए मैं ने जानबूझकर पहाड़, पेड़, नदी और पशुओं के सामने जा कर बोलने का अभ्यास किया । कभी-कभी मैं ने मुंह में एक छोटा पत्थर रखकर बातचीत करता था , ताकि मुंह की शक्ति को मजबूत किया जा सके । अनगिनत बार अभ्यास करने के बाद चेन च्या रूं ने महसूस किया कि दिल में अशांत होना , या मानसिक तौर पर तनावग्रस्त रहना हकलाहट का प्रमुख कारण है । इसलिए हकलाहट को दूर करने के लिए सर्वप्रथम दिल में मौजूद अस्वाभाविकता को दूर किया जाना चाहिए । श्री चेन ने हकलाहट के इलाज में लम्बी सांस लेने , विशेष मांस पेशियों का अभ्यास, उच्चारण अभ्यास आदि तरीकों का अनुसंधान किया ।
श्री चेन ने अपने उपायों की चर्चा में कहा कि जब हम मानसिक तनाव को दूर कर लेते हैं , तब हमें एहसास होता है कि दिल में प्राकृतिक शांति कायम हो सकती है , और इस समय अगर दिल में कुछ बातें हैं जिन्हें कहना है , तो मुंह स्वभाविक तौर पर खुलता है ।
अपनी हकलाहट को दूर करने के बाद श्री चेन ने दूसरे हकलाने वालों की मदद करनी चाही। अपने उपायों के जरिये एक विशेष स्कूल खोलकर अधिकाधिक हकलों के दुख दूर करने का विचार उन के मन में आया ।
इधर के वर्षों में श्री चेन ने इलाज के अपने तरीकों से तथा स्कूल के जरिये बहुत से हकलाने वालों की मदद की है और देश के विभिन्न तबकों से अनगिनत सम्मान और प्रशंसा हासिल की है । देश के राजकीय संपदाधिकार ब्यूरो ने उन के हकलाहट इलाज तरीकों के आविष्कार को पैटेंट के लिए सौंपा है , स्थानीय सरकार ने उन्हें सम्मानित किया है, अनेक कालेज़ों ने उन्हें अपने यहां व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया है , देश के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में श्री चेन हकलाहट के इलाज में बहुत उच्च कौशल प्राप्त चिकित्सक के नाम से जाने जाते हैं ।
अब श्री चेन के स्कूल में केवल हकलाहट का इलाज नहीं किया जा रहा है , जवानों के भाषण कौशल का अभ्यास करने का कोर्स भी चलाया जा रहा है । श्री चेन अपने कौशल से अधिकाधिक लोगों को शानदार जीवन उपलब्ध कराना चाहते हैं ।

Friday, December 4, 2009

हकलाने की दवाई होती है क्या ?


आप सब लोगो  को बड़ी  बेताबी से  हकलाहट की  दवाई खोजते नजर आते  मै  देखता हु |  पहले  मै भी ,यही  सोचता  था  की  कोई न कोई दवाई तो अवश्य  होगी  जो हमारी हकलाहट को ठीक कर देगी,कई डाक्टरों को हकलाहट के  इलाज के लिए जाता  था जैसे ही मन में आता की अब बोलना है की मै हकलाता हु,  वैसे ही डर बोलता की- तुम्हारी बदनामी होगी मत कहो' डाक्टर   हँसेगे, और मै बोलता की डॉक्टर  साहब मुझे बुखार आती है ,   दवाई लेता और  चला आता, एक बार हद तब हो गई जब मुझे बिना बुखार के, सूजी लगवानी पड़ी
दोषतो आप को हकलाहट की दवाई अवश्य मै दुगा  जो मैंने खाई थी  वह दवाई है विचारो को बदलने की ,थोडा थोडा डेली अपने  आप को बदलने की ,हकलाहट को स्वाविकार करने की , ठीक बोलने की कोशिश करने की ,यदि आप केवल  थोड़ी  सा प्रयास करेगे , आपने आप को बदलने की, तो आप पायेगे की, आप तो थोड़ी प्रयास कर रहे है  लेकिन  भागवान आप को अधिक फल देगा |  यहाँ मै कुछ बाते लिखता हु जो आप को सफलता अवश्य दिलाएगी
1- मुझे  हमेशा याद रखना  चाहिए की मै तनाव मुक्त्य ,निडर  आत्मा विश्वाशी आराम से बोलने  वाला  आदमी हु |
२- आदत को सुधारना है  थोडा अ आप को स्पीड धीमी करनी होगी | मै यहाँ पर एक बात कहुगा की हकलाने वाले लोग यह मानते ही नहीं की मै अधिक स्पीड से बोलता हु ,या जानते ही नहीं है की अनियंत्रित स्पीड हमारी हकलाहट का एक कारण है |
हम सबको थोडा सा स्पीड कम करना चाहिए ,बहुत से लोग कहते है की मै धीरे नहीं बोल सकता | मै आप से यह नहीं कह रहा हु की आप बिलकुल धीमा गाने जैसा बोलो ,लेकिन इतना कण्ट्रोल करो की आप के स्पीच ओरगन सही वर्क कर सके ,आप को बोलने का मौका मिले ,आप को सोचने का मौका मिले , आप की आवाज सुनने वालो को समझ में आनी चाहिए | अब सवाल यह है  की मै कितना धीमा बी बोलु , आप स्याम अपनी आवाज सुनो ,और जो स्पीड आप को सुनने ,समझने  में ठीक लगे वाही आप की सही स्पीड होगी ,प्रारंभ में आप थोडा और धीमा बोले तो बेहतर होगा ,लेकिन गाने जैसा नहीं बोलना चाहिए |
जब आप धीमा बोलने की कोशिश करेगे तो प्रारंभ में थोडा अटपटा लगेगा क्योकि आप अधिक स्पीड बोलने के आदि है| आप के मन में कुछ नेगतीवे विचार भी आयेगे जैसे मै कब तक धीमा बोलूगा , इतनी देर मेरी बात कौन सुनेगा , मै अभी नहीं बाद में धीरे बोलूगा , अभी यहाँ एसे ही बोलता हु बाद में सुधारुगा , सभीलोग तो स्पीड ही बोलते है वह क्यों नहीं अटकते है ,मै ही क्यों अटकता हु 
हमको  कुछ बदलना पड़ेगा ,अपने आप को ,विचारो हो , स्पीच ओरगन के वोर्किंग करने के तरीको को , एक फ़ॉर्मूला याद आता है
                                     चेंज ( अपने आप को )               =                सुधार ( आप की स्पीच में )
                                    १  स्पीड कण्ट्रोल                            २- आप की स्पस्ट  आवाज आयेगी 
                                   २ -स्पीच ओरगोन                           २-  चेहरा में सिकुडन ख़त्म होगी 
                                   ३- हकलाना को स्वबिकर करो          ३-  डर दिमाग से निकलेगा 
                                   ४-  ध्यान से दुसरो की बात सुनो      ४= अंसार  देने ,और प्रशन पूछने का मनोबल बढेगा
                             ५- स्माल स्माल वाक्य उपयोग करना     ५=लम्बे समय तक बात कर सकते हो

  

Monday, July 13, 2009

सतना स्टेमेरिंग असोसीएसन

सतना चेप्टर में आप सबका स्वागत है ,यह ऐसे लोगो का असोसीएसन है जिसे वाणी दोष् तुतलाना हकलाना ,नाक से बोलना ,या अस्पस्ता आवाज की समस्या है , इस असोसीएसन का उदेश निम्न लिखित है
१- वाणी दोष् से पीड़ित लोगो की हर सम्भव मदत एवं जागरूपता प्रदान,करना
२- समाज और वाणी दोष् से पीड़ित लोगो के बीच मित्र भावः के सम्बन्ध बानाने में मदत करना

३- ऐसा पलट फॉर्म तैयार करना जिसमे सभी हकलाने वाले लोग आपनी बात, दुःख ,दर्द ,अनुभव ,आपस में बाटसके






Saturday, April 25, 2009

STAMMMERING = हकलाना हिन्दी

HOW TO STOP STAMMERING
हकलाना को स्वाविकार करना चाहिए ,मै कई वर्षो तक हकलाने वालो के साथ कार्य किया और पाया की ये लोग हकलाना को स्वाविकार नही करते है और हमेशा छुपाने की कोशिश करते है आपने आप से ,अपने दोषतो से ,अपने माता पिता से , यहाँ तक की हर किसी से ,मैभी इसी लाइन में चल रहा था , मुझे लगता था की यदि कोई मेरी हकलाहट को जान गया तो मेरी मजाक उडाएगा और मै आंखे नीचे करके बात करने लगा ,जितना ठीक करने का प्रयाश करता उतना मेरी हकलाहट बढरही थी मै आप को मेरी जीवन की कुछ घटनाये बताता हु |
०१-एक बार मुझे सतना से पटना रेलवे की परीक्षा देने जारहा था ,जैसे ही सतना रेलवे की टिकिट खिड़की में पंहुचा वैसे ही मेरी धड़कन तेज हो गई और मै लाइन में डरते हुआ खड़ा हुआ जब मेरा नंबर आया तब मै बोला पपपपपा ----------अपपप -------रुक गया ,पीछे वाले ने धक्का दिया मै लाइन के बहार हो गया | दूसरी बार फिर हिम्मत किया फिर पपपपपपपप ------अपपपप रुक गया उस के बाद टिकिट नही ले पाया , उस समय मै अपने आप को बहुत गाली दिया और नेगटिव बाते मन में आप चालू हुई
०२- अक्शर क्लास रूम में जब हिन्दी की क्लास होती थी तब मुझे खड़ा किया जाता था और बुक पढने के लिए सर बालते थे ,अब जब मै पड़ता तब ओठ ऐसे चिपकता जैसे गोद लगाकर चिपकाते है , कोई भी अक्षर बहार नही आता
तब सभी लड़के तली बजाते और बोलते सर गाड़ी आगे नही जाएगी ,गयर चेंज कीजिये और सर मेरी पिटाई करते , पिटाई का मतलब गयर चेंज हो गया |

Wednesday, April 22, 2009

हकलाना

हकलाना हमारे सामाजिक जीवन हमेशा कही न कही दिखाई पड़ता है हलने वाले लोग किसी कारन से सामान्य तौर से नही बोल पते है हकलाना आम तौर पर बचपन से ही प्रारम्भ होता है यह रोग किस कारन से होता है इसका अभी तक सही पता ही नही लगाया जा सका है ,कुछ सामान्य कारन है जिससे हकलाना अधिक देखा गया है
१- किसी हकलाने वाले की नक़ल करने से
२-किसी से डर डर कर अधिक समय तक रहने से
3-किसी लम्बी बीमारी ,एक्सीडेंट से
४- कमजोर आई क्यू से
५ बचपन में लंबे समय तक बच्चे का घर में अकेले रहने से
६- किसी हीनभावना के आजाने से

Monday, April 13, 2009

अपने आप को धोखा

मै अपने आप से २६ वर्ष तक यही कहता था
१- मेरे आलावा कोई नही हकलाता है
२- मेरे जीवन में हकलाना ही लिखा है
३- मै कई स्पीच थेरापिस्ट ,ई एन टी डॉक्टर को दिखा दिखा कर हार मान गया हु अब मेरी लाइफ बेकार है मै इसी प्रकार हकला हकला कर ,घुट घुट कर जिउगा ,हे भगवन कोई तो दवाई बताओ ,कुछ तो उपाय करो की मै ठीक हो जाऊ ,
४- हकलाना मेरा सबसे बड़ा दुसमन है यह इंटर वियु में फ़ैल करता है ,बात करने में प्रोब्लम पैदा करता है ,आँखों को मिला कर बात करने का आत्मा विश्वास तोड़ता है | ओंठ ,जीभ ,दन्त ,स्पीच ओरगन को हार्ड कर देता है | यदि मेरी हकलाहट ठीक होजयतो मै सारे कामो में सफल हो जाउगा |
५-बोलने के पहले ही मै हार मान लेता था, आपने आप से कहने लगता था की नही नही नही मै नही बोल पाउगा |
और मै नही बोल पता था
६- मेरी आंखे कभी अधिक खुल जाती , तो कभी बिल्कुल चिपक जाती ,कभी ओंठो में पेस्ट लग जाता और चिपक जाते ,तो कभी इतना खुल जाते की बंद ही नही होते मै बंद करने का प्रयास करता ओंठ और अधिक खुल जाते ,मै परेसान होता की कभी ओंठ चिपक जाते है तो कभी बंद ही नही होते , हे भगवन मुझे कोई तो रास्ता बताओ मेरे ओंठ सही ढंग से ओपन क्लोस हो सके प्ल्ज़ हेल्प में गोड़.........
७- प, फ ,ब, , म , ये अक्षर थे जो मेरे दुश्मन थे जब की प्र, ब्रा, क्र,त्र ,म्र ..... इसी प्रकार के अन्य अक्षर मेरे जानी दुसमन थे मेरा नम भी बी या वि से चालू होता था मै इतना डरता था की यदि कोई मेरा नाम पूछ ले वही सबसे बड़ा दुश्मन होता था हे भगवन इसके पास जारहा हु ,यह मेरा नाम ना पूछे तो मै कल एक नारियल अवश्य तोडुगा हे भगवन प्ल्ज़ नाम मत पुछ्वाना प्ल्ज़ प्ल्ज़ प्ल्ज़ ........|
८-पापा और अंकल से मै बहुत डरता था | मेरी लाइफ में इनके द्वारा बहुत प्रताड़ित किया गया ,मै यह तो आज भी नही जान सका की उनका इस प्रकार डाटना उचित था या अनुचित पर मेरे मन में दिमाग में आज भी इनका खौफ बैठ गया है | आज भी यदि ये लोग बुलाते है तो लगता है की कोई कोर्ट का जज बुला रहा है पता नही कौन सी सजा दे दे | मै आज भी भगवन से प्राथना करता हु की इनका सामना नही हो ,डर पापा अंकल से नही लगता ,इनके द्वारा किए गए पिछेले व्यव्हार से ,बातो से , लक्षण से डर लगता है
८-