STAMMERING PSYCHO LOGY
हकलाना क्यों होती है, सबसे पहले आप अपने आप से पुछिये?; जहां तक मेरा अनुभव कहता है,कि हकलाहट होने का मेन कारण ''छुपाना '' है। हम जब बोलते है तो बोलने के पहले हमें पता चल जाता है, कि मै किस अक्षर या शब्द में रुकने वाला हूँ। जैसे मान लीजिए कि कोई वाक्य '' मैं सूरज हूँ बहुत दिनों से मैहर में रहता हूँ '' बोलना है। अब हमारी आदत होती है ,कि बोलने के पहले पूरे वाक्य को मन ही मन चेक करते है और प्रीब्यू देखते है, की मै किस शब्द में रुकने वाला हूँ या मैं किस शब्द को नही बोल पाउँगा। और बोलने के पहले ही हम तय कर लेते है कि मै इस शब्द को नही बोल पाउँगा। यह भी कह सकते हैं। कि हम बोलने के पहले ही हार मान लेते हैं कि मैं वह शब्द नहीं बोल पाउँगा। मान लीजिए मैं सूरज बहुत दिनों से मैहर में रहता हूँ। इस वाक्य को अपने बोलने से पहले मन में चेक किया और मैहर शब्द को कठिन मान लिया और नही बोल पाने का निर्णय ले लिया लेकिन आप पूरा प्रयास करते है। कि जब कठिन शब्द मैहर आये तब हम छूपा लें और सामने वाले को पता ही नही चले। इस समय आप पूरा जोर ठीक बोलने पर लगा रहे होते है और छुपाने का पूरा प्रयास कर रहे होते है। अब सवाल यह हैं, कि क्या आप पूरी तरह से छुपा पाते हैं अपने शब्दों को ? शारद नहीं। छुपाने की आदत और न छुपा पाने की आदत के बीच संघर्स प्रारंभ होता है और आप लगातार छुपाने का युध्द लड़ते रहते है और लगातार युध्द लड़ने से आप बहुत सारे विनाशकारी विचारों , आदतों में उलझे रहते हैं।
1 . पहले वाक्य को तोड़ मरोड़ देते हैं। आपको बोलना है '' मेरा नाम सूरज है '' लेकिन आप इस वाक्य को सूरज नाम है मेरा, मेरा नाम है सूरज ' है मेरा नाम सूरज इस प्रकार के वाक्य बोलते हैं ऐसा बोलने से आपको क्षणिक लाभ भी मिलता है। किसी तरह बोले, बोले, तो सही यही तसल्ली आप अपने आपको देते है। आप वाक्य को इसलिए तोड़ मरोड़ रहे है क्योंकि। सूरज बोलने का विश्वास आप में कम है। यदि आपको लगता है कि मै अभी सूरज बोल सकता हुँ। बाद में पता नही विश्वास आता हैं या नहीं।तब आप को लगता है कि अभी सूरज नहीं बोल पाउँगा। यदि कुछ शब्द अभी बोलें तब तक शायद हमें सूरज बोलने का अभ्यास हो जाये तब आप पहले सरल शब्दों को बोलना प्रकट करते हैं। बाद में कठिन और इस प्रकार बोलते हैं। मेरा नाम है सूरज 'और आप कई बार सफल भी रहते हैं। तो आपको एक आशा रहती हैं कि मेरी यह तेविनक काम आ सकती है लेकिन ऐसा बार बार होता नही है। कई बार आपकी यह टेविनक फेल हो जाती है। और आप फिर उलझ जाते हैं। और फिर आप सूरज की जगह ''सन '' सूर्य जैसे पर्यावाची शब्दों का सहारा लेकर वाक्य पूरा करने का प्रयास करते है। यह प्रयास भी कई बार फेल हो जाता है तब आपका सबसे बड़ा दुश्मन हकलाना ब्लेकेज के रूप में आता है। अब आप इस ब्लेकेज को छुपाने के लिए भी बहुत सारे प्रयास करते है। आँखो को यहाँ वहाँ घूमा लेना बोलना ही बंद कर देना हम से नहीं आता बाद में बताउँगा याद नहीं आ रहा इसी प्रकार के अनेको रूप से उपाय करने लगते हैं।
1 . पहले वाक्य को तोड़ मरोड़ देते हैं। आपको बोलना है '' मेरा नाम सूरज है '' लेकिन आप इस वाक्य को सूरज नाम है मेरा, मेरा नाम है सूरज ' है मेरा नाम सूरज इस प्रकार के वाक्य बोलते हैं ऐसा बोलने से आपको क्षणिक लाभ भी मिलता है। किसी तरह बोले, बोले, तो सही यही तसल्ली आप अपने आपको देते है। आप वाक्य को इसलिए तोड़ मरोड़ रहे है क्योंकि। सूरज बोलने का विश्वास आप में कम है। यदि आपको लगता है कि मै अभी सूरज बोल सकता हुँ। बाद में पता नही विश्वास आता हैं या नहीं।तब आप को लगता है कि अभी सूरज नहीं बोल पाउँगा। यदि कुछ शब्द अभी बोलें तब तक शायद हमें सूरज बोलने का अभ्यास हो जाये तब आप पहले सरल शब्दों को बोलना प्रकट करते हैं। बाद में कठिन और इस प्रकार बोलते हैं। मेरा नाम है सूरज 'और आप कई बार सफल भी रहते हैं। तो आपको एक आशा रहती हैं कि मेरी यह तेविनक काम आ सकती है लेकिन ऐसा बार बार होता नही है। कई बार आपकी यह टेविनक फेल हो जाती है। और आप फिर उलझ जाते हैं। और फिर आप सूरज की जगह ''सन '' सूर्य जैसे पर्यावाची शब्दों का सहारा लेकर वाक्य पूरा करने का प्रयास करते है। यह प्रयास भी कई बार फेल हो जाता है तब आपका सबसे बड़ा दुश्मन हकलाना ब्लेकेज के रूप में आता है। अब आप इस ब्लेकेज को छुपाने के लिए भी बहुत सारे प्रयास करते है। आँखो को यहाँ वहाँ घूमा लेना बोलना ही बंद कर देना हम से नहीं आता बाद में बताउँगा याद नहीं आ रहा इसी प्रकार के अनेको रूप से उपाय करने लगते हैं।
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